अंगदान के मामले में जींद टॉप पर
हरियाणा में 7940 ने किया अनुदान का संकल्प इनमें 1076 जींद के, पलवल और चरखी दादरी सबसे निचले पायदान पर

सत्य खबर हरियाणा
Organ Donation : हरियाणा में अंगदान को लेकर अब लोगों में काफी जागरुकता आने लगी है। लोगों की सोच में तेजी से हो रहे बदलाव का परिणाम है कि प्रदेश में कुल 7940 लोगों ने अंगदान का संकल्प लिया है। अगर पड़ोसी राज्य पंजाब से तुलना की जाए तो हरियाणा का आंकड़ा अभी काफी कम है और इस अभियान को तेजी से गति देने की जरूरत है। हालांकि जिलों के बीच आंकड़ों में बड़ा अंतर भी सामने आया है, जो जागरूकता के असमान स्तर को दर्शाता है।
प्रदेश में जींद जिला 1076 पंजीकरण के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद गुरुग्राम के 973 पंजीकरण और फरीदाबाद के 791 पंजीकरण का नंबर आता है।

सबसे निचले पायदान पर चरखी दादरी के 21 और पलवल के 21 पंजीकरण हैं। नूंह में 48 लोगों ने पंजीकरण कराया है। जिन जिलों में कम लोगों ने पंजीकरण करवाया है, वहां जागरूकता अभियान की सख्त जरूरत महसूस की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि निचले पायदान पर खड़े जिलों में जागरूकता बढ़ाई जाए तो हरियाणा इस क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो सकता है। फिलहाल आंकड़े यह जरूर संकेत दे रहे हैं कि प्रदेश में अंगदान को लेकर डर से संकल्प की ओर यात्रा शुरू हो चुकी है, लेकिन इसे जनआंदोलन बनाने के लिए अभी और प्रयास जरूरी हैं।
नेशनल आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन के ताजा आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब नए पंजीकरण बहुत कम हो रहे हैं। अब प्रदेश में इक्का दुकान लोग ही पंजीकरण करवा रहे हैं। यह स्थिति बताती है कि शुरुआती उत्साह के बाद अब अभियान को और गति देने की जरूरत है। उम्र के आधार पर देखें तो युवा वर्ग इस अभियान में सबसे ज्यादा सक्रिय है। विशेषज्ञों का मानना है कि युवाओं में जागरूकता और सोशल मीडिया की पहुंच इस बढ़ोतरी का प्रमुख कारण है। खासकर युवा वर्ग और पुलिस-सेना जैसे अनुशासित बलों के परिवार सबसे आगे आ रहे हैं।
प्रदेश में सोटो के अनुसार ब्रेन डेड की स्थिति में व्यक्ति की वापसी संभव नहीं होती, ऐसे में अंगदान जीवनदान का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है। यही कारण है कि अब पुलिस और सेना से जुड़े परिवारों के साथ-साथ युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर इस अभियान में भाग ले रहा है। राज्य में अंगदान के मामलों में भी धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल रहा है।
वर्ष 2024 में जहां केवल 2 अंगदान हुए थे, वहीं 2026 में यह आंकड़ा 4 से अधिक हो चुका है। साथ ही अब तक करीब 35 किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस बदलाव के पीछे स्टेट आर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन (सोटो) की अहम भूमिका रही है। सोटो ने पिछले दो वर्षों में गांव-गांव तक पहुंच बनाते हुए नुक्कड़ नाटक, स्कूल-कालेज सेमिनार और पंचायत बैठकों के जरिए लोगों को जागरूक किया है।
जिला अनुसार पंजीकरण की स्थिति यह है कि जींद 1076, गुरुग्राम 973, फरीदाबाद 791, भिवानी 516, रोहतक 506, महेंद्रगढ़ 481, पंचकूला 437, हिसार 419, झज्जर 402, सोनीपत 375, रेवाड़ी 350, सिरसा 287, अंबाला 268, पानीपत 182, फतेहाबाद 174, कैथल 171, यमुनानगर 159, करनाल 150, कुरुक्षेत्र 133, नूंह 48, चरखी दादरी और पलवल 21-21
डॉ. एचके अग्रवाल का कहना है कि लोगों में अंगदान की जागरुकता को लेकर डर कम हो रहा है। पहले जहां लोग भ्रांतियों के कारण इससे दूर रहते थे, वहीं अब वे खुद सोटो कार्यालय में संपर्क कर प्रक्रिया की जानकारी ले रहे हैं। अंगदान एक ऐसा फैसला है, जिससे एक व्यक्ति 8 लोगों की जान बचा सकता है। मौत अटल है, लेकिन अंगदान के जरिए हम किसी के जीवन का आधार बन सकते हैं।
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